बंगलुरू की वह भव्य ‘टॉक्सिक’ शाम

दीपक दुआ

कन्नड़ फिल्मों को लेकर हिन्दी या दूसरी भाषाओं के दर्शकों में इतना उत्साह कभी नहीं था। दरअसल कोरोना काल में जिस तरह से दर्शकों ने खुल कर विभिन्न भाषाओं और विभिन्न स्वादों के सिनेमा पर अपनी पसंदगी दिखाई उससे भारतीय सिने उद्योग में बहुत सारी हलचलें हुईं। इसी का परिणाम है कि कभी किसी बहुत बड़े बजट की फिल्म को दर्शक धूल चटा देते हैं तो कभी कोई कम बजट की फिल्म ओ.टी.टी. के किसी प्लेटफॉर्म पर चढ़ कर कामयाबी का बिगुल बजाने लगती है।

दक्षिण भारत की फिल्मों के प्रति हिन्दी के दर्शकों की दीवानगी भी लॉकडाउन के बाद काफी बढ़ी जिसके चलते अब हर बड़े बजट की फिल्म को इस तरह से बनाया जा रहा है कि वह सिर्फ अपने भाषाई क्षेत्र के अलावा पूरे भारत और हर उस देश में भी रिलीज की जा सके जहां भारतीय सिनेमा को देखने वाले लोग रहते हैं। यही कारण है कि अब साउथ इंडिया की फिल्मों को भी बहुत बड़े बजट के साथ बनाया जाने लगा है क्योंकि अब उन्हें अपनी लागत निकालने के लिए सिर्फ अपने राज्य के दर्शकों पर ही निर्भर नहीं रहना है। इसीलिए अब साउथ के उन कलाकारों को भी हिन्दी पट्टी में लोग जानने लगे हैं जो अपने क्षेत्र विशेष तक ही सीमित थे। एक परिवर्तन यह भी आया है कि अब दक्षिण भारत में बनने वाली फिल्मों में दूसरी भाषाओं के सिनेमा के नामी कलाकार लिए जाने लगे हैं ताकि उस सिनेमा के दर्शकों को भी अपनी फिल्म की ओर आकर्षित किया जा सके। 

पहले सिर्फ तमिल और तेलुगू का सिनेमा ही हिन्दी क्षेत्र में डब होकर आता था। वहां के बहुत सारे कलाकार भी इधर आकर बड़ा नाम कमा गए। लेकिन बीते कुछ सालों में मलयालम और आश्चर्यजनक रूप से कन्नड़ के कलाकारों और फिल्मों ने भी हिन्दी क्षेत्र में अपनी खासी बढ़त बना ली है। मलयालम के फहाद फाजिल की हिन्दी के दर्शकों में बढ़ती लोकप्रियता किसी से छुपी नहीं है। कन्नड़ की ‘के.जी.एफ.’ की सफलता ने यश और ‘कांतारा’ की अपार कामयाबी ने ऋषभ शैट्टी को हिन्दी वालों के बीच खासा नाम और पहचान दी है। कन्नड़ की बात करें तो रॉकिंग स्टार कहे जाने वाले यश ने हिन्दी की तरफ जो दरवाजा खोला है उसने ही कन्नड़ सिनेमा को यह ताकत दी कि अब यश की अगली फिल्म ‘टॉक्सिक’ 600 करोड़ से भी अधिक के बजट में बन कर कन्नड़ के अलावा तमिल, तेलुगू, मलयालम, हिन्दी और अंग्रेजी में पूरे भारत व बाहर के कई देशों में भी 26 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। हाल ही में बंगलुरू में ‘टॉक्सिक’ के ट्रेलर लॉन्च के अवसर पर जिस तरह भारत के अनेक शहरों से बड़ी तादाद में मीडिया को बुलाया गया, उससे यह भी पता चलता है कि इसे बनाने वाले इस फिल्म को किस पैमाने पर रिलीज करने जा रहे हैं।

टॉक्सिक नजारे

बंगलुरू हवाई अड्डे पर देश के विभिन्न शहरों से पहुंच रहे मीडियाकर्मियों के लिए ‘टॉक्सिक’ लिखी बसों की कतार लगी हुई थी। हर बस में हर सीट पर टॉक्सिक लिखे हुए पोस्टर और नाश्ते के डिब्बे रखे हुए थे। पीने के लिए डिटॉक्स वॉटर था। ग्रैंड शेरेटन होटल के रिसेप्शन पर विभिन्न शहरों के बोर्ड लगे हुए थे जहां उन शहरों से आए मीडिया वाले चेकइन करवा कर शानदार कमरों में पहुंच रहे थे। थोड़ी ही देर में बसों से सभी को वहां के मशहूर एएमबी सिनेमा ले जाया गया। किसी जमाने में यह बंगलुरू का लोकप्रिय सिंगल स्क्रीन सिनेमा ‘कपाली थिएटर’ हुआ करता था। आज यह जगह कपाली माल के तौर पर जानी जाती है जिसमें 9 स्क्रीन वाला एएमबी थिएटर है। इसी थिएटर के सबसे बड़े ऑडिटोरियम में सैंकड़ों की तादाद में मीडिया और सोशल मीडिया के लोग मौजूद थे। बताया गया कि शाम 7 बज कर 1 मिनट पर यह कार्यक्रम शुरू होगा। थिएटर के बाहर सैंकड़ों की तादाद में यश व अन्य फिल्मी सितारों के प्रशंसक हल्की बारिश में भी घंटों तक जमे रहे ताकि अपने चहेते स्टार्स की एक झलक देख सकें।

टॉक्सिक ट्रेलर

फिल्म से जुड़े बाकी कलाकार तो पहले आकर बैठ गए और ठीक 7 बज कर 1 मिनट पर ऑडिटोरियम में यश की एंट्री से प्रोग्राम शुरू हो गया। छह भाषाओं में इस फिल्म का ट्रेलर दिखाया गया जो बताता है कि यश इसमें पिता और पुत्र की दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। इस फिल्म को एक जबर्दस्त गैंग्स्टर एक्शन थ्रिलर बताया जा रहा है जिसमें वीभत्स हिंसा और ढेरों बोल्ड सीन भी हैं। फिल्म के नाम के साथ ‘ए फेयरी टेल फोर ग्रोन अप्स’ की टैगलाइन भी यह बताती है कि इस फिल्म में जो मनोरंजन है उसे वयस्क दर्शकों को ध्यान में रख कर परोसा गया है। इसके बाद फिल्म के निर्माता वेंकट के. नारायणन ने कहा कि यह एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है और उन्हें पूरा भरोसा है कि यह फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ-साथ भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

टॉक्सिक जमावड़ा

फिल्म ‘टॉक्सिक’ की डायरेक्टर वह गीतू मोहनदास हैं जो हिन्दी में ‘लायर्स डाइस’ नाम से एक शानदार फिल्म बना चुकी हैं जिसे दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे और उसे भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए भी भेजा गया था। इस फिल्म के कलाकारों में से कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत, अक्षय ओबरॉय व अन्य कई कलाकार भी वहां मौजूद थे। फिल्म के निर्माता, लेखक और मुख्य अभिनेता यश जब स्टेज पर आए तो देर तक तालियां और सीटियां बजती रहीं। यश ने कहा कि ‘टॉक्सिक’ कोई कन्नड़, तमिल या तेलुगू फिल्म नहीं है बल्कि यह एक ‘भारतीय’ फिल्म है जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों ने मिल कर काम किया है। यश ने यह भी कहा कि यह फिल्म अपने समय से थोड़ा आगे की है जिसमें लीक से हट कर कुछ अलग करने की कोशिश की गई है। यश ने यह भी भरोसा दिलाया कि उन दर्शकों को यह फिल्म जरूर पसंद आएगी जो फिल्म में भव्यता के साथ एक्शन और इमोशन देखना चाहते हैं।

Sai Pallavi may replace Deepika Padukone in Kalki 2…?

Prabhas’ sci-fi blockbuster Kalki 2898 AD created waves at the box office after its 2024 release, and excitement is now building around its much-awaited sequel. As the film nears its two-year mark, reports suggest that work on Kalki 2898 AD Part 2 may begin soon, with filming expected to start in February 2026. Alongside this update, a new casting rumour has caught fans’ attention.

According to ongoing speculation, Sai Pallavi is being considered to replace Deepika Padukone in the sequel. Earlier reports had hinted at Alia Bhatt as a possible choice, but current buzz points toward Sai Pallavi as the frontrunner. However, the makers have not made any official announcement, and the reports remain unconfirmed.

Previously, the team revealed that they would not continue with Deepika Padukone due to scheduling challenges. Meanwhile, Prabhas is set to juggle Kalki 2898 AD Part 2, Spirit, and Fauji, as director Nag Ashwin expands the epic mythological sci-fi universe further.